Operation Mahadev: महादेव पीक पर 6 आतंकी, अमेरिकी हथियार से सनसनी पर बड़ा खुलासा, जांच एजेंसियों का माथा घूमा
जम्मू-कश्मीर के महादेव पीक पर ऑपरेशन महादेव के तहत बड़ा खुलासा हुआ है। खुफिया एजेंसियों ने जानकारी दी है कि यहां 6 आतंकी छिपे हुए हैं और उनके पास अत्याधुनिक अमेरिकी हथियार भी मौजूद हैं। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और सर्च ऑपरेशन जारी है। सूत्रों के मुताबिक, ये आतंकी बड़ी साजिश की फिराक में थे। अब ऑपरेशन महादेव के जरिए पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर के महादेव पीक पर 28 जुलाई 2025 को ऑपरेशन महादेव हुआ. इस आतंकी एनकाउंटर में भारतीय सेना (जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई) ने ऑपरेशन महादेव के तहत तीन आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया. अब इस मामले में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है.

पहलगाम अटैक का हिसाब हो गया. भारत के जांबाजों ने पहलगाम अटैक के 3 गुनहगारों को जहन्नुम पहुंचा दिया. ऑपरेशन महादेव के तहत पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड हाशिम मूसा समेत तीन आतंकी ढेर कर दिए गए. अब उसी महादेव ऑपरेशन को लेकर जांच एजेंसियों को बड़ी जानकारी हाथ में लगी है. इसके मुताबिक, महादेव पीक पर 6 आतंकियों का जमावड़ा था. सुरक्षा एजेंसियों के सूत्र के मुताबिक, जहां पर 28 जुलाई को एनकाउंटर हुआ था, वहां पर करीब आधा दर्जन आतंकियों ने अपना ठिकाना बनाया था.

खुफिया सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक, महादेव पीक पर छिपे ये आतंकवादी बड़ी आतंकी साजिश रच रहे थे. इन आतंकियों की मौजूदगी इस इलाके में चार महीने से अधिक समय से थी. इससे संदेह गहराता है कि उन्होंने घुसपैठ कर इस क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बनाई थी. इसके अलावा पहलगाम बैसरन घाटी में मौजूद ओवर ग्राउंड वर्करों के एक ही नेटवर्क ने पहलगाम आतंकी हमले के आतंकी ग्रुप को बड़ी मदद पहुंचाई थी.
कैसे एक ही ओवर ग्राउंड वर्कर का काम
खुफिया सूत्रों ने बताया कि महादेव पीक पर मौजूद आतंकियों का संबंध लश्कर-ए-तैयबा से था. और ये वही ग्रुप था, जिसने 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले को अंजाम दिया था. जांच में यह भी सामने आया कि पहलगाम आतंकी हमले के गुनहगारों और महादेव पीक पर सक्रिय आतंकियों को एक ही ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क ने लॉजिस्टिक और अन्य सहायता प्रदान की थी. यह नेटवर्क पहलगाम हमले के बाद भी सक्रिय रहा और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने, रसद, और हथियार मुहैया करवाता रहा.
ग्राउंड वर्कर्स ही आतंकियों की बने ढाल
सूत्रों के मुताबिक, पहलगाम आतंकी हमले के बाद इन आतंकियों को सुरक्षित स्थान में रुकने की और रसद मुहैया करवाने की व्यवस्था इसी ओवर ग्राउंड वर्कर्स नेटवर्क ने की थी. खुफिया सुरक्षा एजेंसियों का यह भी मानना है कि पाकिस्तान आर्मी और ISI ने इस ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क को ऑनलाइन ट्रेनिंग दी थी. पेशेवर तरीके से हाइड आउट बनाने, हथियार रखने और हाई प्रोटीन डाइट सोर्स करने की भी इन्हें ट्रेनिंग मिली थी. पहलगाम आतंकी हमले के बाद 10 से ज्यादा ठिकानों को तबाह किया गया है, जो अलग-अलग इलाकों में थे.
मारे गए आतंकियों से अमेरिकी हथियार बरामद
पहलगाम आतंकी हमले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है. मारे गए आतंकियों के पास से अमेरिकी हथियार बरामद हुए हैं. आतंकियों से M-4 अमेरिकी राइफल बरामद हुई है. यह ऐसी रायफल है, जो अफगानिस्तान में यूएस सिक्योरिटी फोर्स ने छोड़ी थी. इसका इस्तेमाल फिलहाल तालिबान और वहां के आतंकी संगठन कर रहे हैं. खुफिया सुरक्षा एजेंसियों को इस बात का अंदेशा है कि अफगानिस्तान से वहीं के आतंकी संगठनों की मदद से पाकिस्तानी सेना ने ऐसे हथियार भारत के खिलाफ सक्रिय आतंकी संगठनों को मुहैया करवाए हैं. इसका इस्तेमाल अब वे आतंकी कश्मीर की सरजमीं पर भारत के हितों के खिलाफ कर रहे हैं. हाल ही के दिनों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब अफगानिस्तान में इस्तेमाल हो रहे ऐसे अमेरिकी हथियार कश्मीर में बरामद हुए हैं. और इनका इस्तेमाल पाकिस्तान परस्त आतंकी संगठन कर रहे हैं.
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