Rahul Gandhi ने जिलाध्यक्षों को ताकतवर बनाने की कही बात कांग्रेस ने ताकतवर नेताओं को जिलाध्यक्ष बना दिया
Rahul Gandhi राजनीति में अप्रत्याशित फैसलों की छवि अक्सर भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़ी रही है। लेकिन इस बार कांग्रेस ने भी एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने सभी को चौंका दिया। दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में कहा था कि जिलाध्यक्षों को ताकतवर बनाया जाए मगर कांग्रेस संगठन ने ताकतवर नेताओं को ही जिलाध्यक्ष बना दिया।

गुना में जयवर्धन सिंह की नियुक्ति से गुस्से में समर्थक
शनिवार की रात गुना की सड़कों पर कांग्रेस विधायकों और कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। यह विरोध किसी और के खिलाफ नहीं, बल्कि पूर्व मंत्री और दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह की जिलाध्यक्ष नियुक्ति के खिलाफ था। हैरानी की बात यह रही कि विरोध करने वाले उनके ही समर्थक थे। उनका कहना था कि इतने बड़े कद के नेता को जिलाध्यक्ष बनाने का मतलब स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की महत्वाकांक्षा पर ताला लगाना है
71 जिलाध्यक्षों की सूची में बड़े नेताओं को मिली जगह
दिल्ली एआईसीसी ने शनिवार शाम को 71 जिलाध्यक्षों की सूची जारी की। इस सूची में न सिर्फ जयवर्धन सिंह का नाम था, बल्कि कई पूर्व मंत्री, विधायक और कभी प्रदेश अध्यक्ष तक रह चुके नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया गया। ओंकार सिंह मरकाम जैसे नेताओं के नाम सामने आने से कांग्रेस का यह कदम और भी चौंकाने वाला साबित हुआ।
कांग्रेस ने अपनाई बीजेपी जैसी रणनीति?
बीते वर्षों में बीजेपी ने उम्मीदवारों के चयन से लेकर मुख्यमंत्री पद की ताजपोशी तक अप्रत्याशित फैसलों से सभी को चौंकाया है। अब कांग्रेस भी उसी राह पर चलती दिख रही है। पार्टी के संगठनात्मक फैसले अक्सर पूर्वानुमेय होते हैं, लेकिन इस बार की जिलाध्यक्ष सूची ने कांग्रेस की छवि बदलने का संकेत दिया है।
क्या राहुल गांधी की राय के बावजूद हुआ उलटफेर?
कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के दौरान राहुल गांधी की मौजूदगी में यह घोषणा की थी कि जिलाध्यक्षों की राय को अहमियत दी जाएगी। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि जिलाध्यक्षों की ताकत बढ़ाई जाएगी। लेकिन सूची देखकर लग रहा है कि ताकतवर नेताओं को ही जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठा दिया गया। इससे यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या राहुल गांधी की मंशा के विपरीत संगठन ने अपना रास्ता चुना?

जीतू पटवारी का मास्टरस्ट्रोक?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को लेकर लंबे समय से कहा जाता रहा है कि वे अपने समकालीन बड़े नेताओं की वजह से संगठन में निर्णय नहीं ले पाते। मगर इस बार जिलाध्यक्ष सूची जारी कर उन्होंने एक ही तीर से कई निशाने साध लिए। अब जिले के बड़े नेताओं को खुद संगठन को जमीन पर मजबूत करने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
जिलों में बन सकते हैं नए पावर सेंटर
कांग्रेस के इस फैसले से कई जिलों में नए पावर सेंटर बनने की आशंका है। जैसे उज्जैन में विधायक महेश परमार को जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनका दबदबा और भी मजबूत हो जाएगा। इसी तरह अन्य 6 विधायकों और 11 पूर्व विधायकों को भी जिला कमान देकर पार्टी ने उन्हें जिले की राजनीति में और ताकतवर बना दिया है।
क्या टिकट वितरण का फॉर्मूला वजह है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बड़े नेता जिलाध्यक्ष बनने के लिए क्यों तैयार हुए? क्या यह राहुल गांधी का वह फॉर्मूला है जिसमें उन्होंने कहा था कि चुनावों में टिकट वितरण का अधिकार जिलाध्यक्षों के पास होगा? यदि ऐसा है तो यह पद बड़े नेताओं के लिए डिमोशन नहीं बल्कि टिकट सुनिश्चित करने का जरिया बन जाएगा।
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