संक्षेप में खबर: Republic Day भारत ने कड़वे रिश्तों के बावजूद दो बार पाकिस्तान के नेताओं को गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था। 1955 में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद और 1965 में खाद्य एवं कृषि मंत्री राणा अब्दुल हामिद चीफ गेस्ट बने। चीन को भी 1958 में एक बार यह मौका मिला। इन पहल का मकसद रिश्ते सुधारना था, लेकिन 1965 के युद्ध के बाद पाकिस्तान को दोबारा न्योता नहीं दिया गया। 77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि होंगे।
Republic Day क्या आपको पता है? पाकिस्तान के नेता भी रहे हैं भारत के गणतंत्र दिवस के चीफ गेस्ट
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते आज चाहे जितने तल्ख क्यों न हों, लेकिन इतिहास में ऐसे मौके भी आए हैं जब भारत ने पड़ोसी देश के नेताओं को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया। गणतंत्र दिवस परेड 2026 से पहले यह जानना दिलचस्प है कि भारत ने कब, क्यों और किन परिस्थितियों में यह कूटनीतिक कदम उठाया था।
77वां गणतंत्र दिवस और चीफ गेस्ट की परंपरा

देश 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी कर्तव्य पथ पर भव्य परेड होगी और विदेशी मुख्य अतिथि समारोह की शान बढ़ाएंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीते 76 वर्षों में पाकिस्तान के नेता दो बार और चीन का नेता एक बार इस परेड में चीफ गेस्ट बन चुका है।
भारत-पाक रिश्तों को सुधारने की कोशिश थी यह पहल
भारत-पाकिस्तान विभाजन और 1947-48 के कश्मीर युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था। इसी तनाव को कम करने और रिश्तों में सुधार की उम्मीद के साथ भारत ने यह बड़ा कदम उठाया। उस दौर के नेताओं को उम्मीद थी कि कूटनीति के जरिए शायद पड़ोसी देश के साथ रिश्ते बेहतर हो सकें।
पहली बार 1955 में आया पाकिस्तानी नेता
जनवरी 1955 में पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनकर आए। यह पहला मौका था जब किसी पाकिस्तानी नेता ने इस समारोह में हिस्सा लिया।
इसी साल पहली बार गणतंत्र दिवस की सैन्य परेड राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर आयोजित की गई। इससे पहले परेड इरविन स्टेडियम (अब मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम) में होती थी।
कौन थे मलिक गुलाम मोहम्मद?
मलिक गुलाम मोहम्मद 1951 से 1955 तक पाकिस्तान के तीसरे गवर्नर जनरल रहे। वे विभाजन से पहले भारतीय सिविल सेवा (ICS) के अधिकारी थे और 1946 में अंग्रेजों द्वारा नाइट की उपाधि से सम्मानित किए गए थे।
हालांकि, पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरपंथ बढ़ने के साथ उनकी राजनीतिक पकड़ कमजोर होती गई। उन्होंने 1953 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ख्वाजा नाजिमुद्दीन की सरकार को बर्खास्त कर संसद और न्यायपालिका को कमजोर करने की शुरुआत की थी।
दूसरी बार 1965 में मिला पाकिस्तान को मौका
करीब 10 साल बाद, जनवरी 1965 में एक बार फिर पाकिस्तान का प्रतिनिधि भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बना। इस बार पाकिस्तान के खाद्य एवं कृषि मंत्री राणा अब्दुल हामिद परेड में शामिल हुए।
उस समय भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री थे। राणा अब्दुल हामिद पंजाबी जमींदार थे और राणा वंश से ताल्लुक रखते थे, जिनकी जड़ें सिंध के उमरकोट के हिंदू राजपूतों से भी जुड़ी मानी जाती हैं।
दोस्ती की उम्मीद, लेकिन मिला धोखा
दुर्भाग्य से, यह कूटनीतिक पहल ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। गणतंत्र दिवस के महज दो महीने बाद ही पाकिस्तान ने कच्छ के रण में सैन्य घुसपैठ कर ऑपरेशन डेजर्ट हॉक शुरू कर दिया।
इसके बाद मई 1965 में दोनों सेनाओं के बीच बड़ा टकराव हुआ और सितंबर 1965 में भारत-पाकिस्तान के बीच करीब तीन हफ्ते तक युद्ध चला।
ऑपरेशन जिब्राल्टर और 1965 का युद्ध
अगस्त 1965 में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन जिब्राल्टर के तहत घुसपैठ की। योजना थी कि सादी वर्दी में सैनिक भेजकर विद्रोह भड़काया जाए। लेकिन स्थानीय लोगों ने घुसपैठियों को भारतीय सेना के हवाले कर दिया।
इसके बाद शुरू हुआ 1965 का युद्ध, जिसने दोनों देशों के रिश्तों को पूरी तरह तोड़ दिया। जनवरी 1966 में ताशकंद समझौते के जरिए अस्थायी शांति स्थापित हुई।
चीन को भी एक बार मिला था न्योता

भारत ने 1958 में चीन के नेता मार्शल ये जियानयिंग को गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि बनाया था। यह 1962 के भारत-चीन युद्ध से पहले की बात है, जब सीमा विवाद इतना गहरा नहीं हुआ था। युद्ध के बाद चीन को दोबारा यह मौका कभी नहीं मिला।
गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि चुनने की प्रक्रिया
गणतंत्र दिवस के चीफ गेस्ट का चयन आसान नहीं होता। इसकी प्रक्रिया करीब छह महीने पहले शुरू हो जाती है। विदेश मंत्रालय भारत के राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक हितों को ध्यान में रखकर संभावित देशों और नेताओं पर विचार करता है।
77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ के नेता होंगे मेहमान
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर इस बार यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि होंगे।
यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेएन 25 से 27 जनवरी तक भारत दौरे पर रहेंगे। वे गणतंत्र दिवस समारोह के साथ-साथ भारत–EU शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे।