Uttarkashi हादसाधराली की तबाही की तस्वीरें देख कांप उठेगी रूह
Uttarkashi उत्तराखंड की शांत और खूबसूरत वादियों में बसे धराली गांव में ऐसी त्रासदी आई कि लोगों का सब कुछ पल भर में उजड़ गया। दूर से अगर कोई मकान दिख रहा है, तो समझिए वह पूरी तरह मलबे में दब चुका है बस छत का एक कोना दिखाई देता है। उस मकान में कोई था या नहीं ये अभी भी रहस्य बना हुआ है।

जब मलबे का सैलाब आया तो बचने का वक़्त भी नहीं मिला
धराली घाटी में जब खीर गंगा की ओर से अचानक पानी, पत्थर और मलबे का सैलाब आया, तो उसकी रफ्तार इतनी तेज़ थी कि महज़ 30 सेकंड में यह आधा किलोमीटर तक फैल चुका था। रिपोर्ट्स के अनुसार इसकी गति लगभग 15 मीटर प्रति सेकंड थी और इसका दबाव 250 किलोपास्कल तक मापा गया।
इस रफ्तार से जब मलबा बहता है, तो उसके सामने चाहे मकान हो, होटल हो या कोई मजबूत इमारत सबकुछ चंद पलों में धराशायी हो जाता है।
पुल जो हर दिन की जिंदगी का हिस्सा था अब केवल एक मलबा
एक और तस्वीर जो सामने आई है, वह घाटी के उस पुल की है, जिसे स्थानीय लोग हर दिन पार किया करते थे। वही पुल अब मलबे में तब्दील हो चुका है। पुल की हालत देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि तबाही कितनी भयानक थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद जब हालात का जायज़ा लेने पहुंचे तो उन्होंने इस पुल को देखकर ही हादसे की गंभीरता को समझा।

मुख्यमंत्री ने लिया हालात का जायज़ा, राहत कार्यों में तेजी के निर्देश
मुख्यमंत्री धामी ने न केवल स्थिति का मुआयना किया, बल्कि पीड़ित परिवारों से मुलाकात भी की। वे सेब किसानों से मिले और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के सख्त निर्देश दिए। उनकी मौजूदगी ने स्थानीय लोगों में कुछ हद तक भरोसा और साहस जरूर बढ़ाया।
बिना जान की परवाह किए डटे हैं हमारे जवान
धराली हादसे के तुरंत बाद भारतीय सेना, अर्द्धसैनिक बल और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) ने मोर्चा संभाल लिया। राहत और बचाव कार्य में लगातार तेजी लाई जा रही है।
NDRF के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि अब तक करीब 150 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, लेकिन 11 सैन्यकर्मी अभी भी लापता हैं। DIG (ऑपरेशन) मोहसिन शाहेदी ने बताया कि तीन टीमें धराली गांव के लिए रवाना की गई हैं। सेना ITBP और SDRF की टीमें भी प्रभावित क्षेत्र में लगातार काम कर रही हैं।
तीर्थयात्रियों को रस्सी के सहारे बचाया गया

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के प्रवक्ता कमलेश कमल ने जानकारी दी कि किन्नौर कैलाश यात्रा मार्ग पर फंसे 413 तीर्थयात्रियों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया है। रास्ता पूरी तरह बह चुका था, लेकिन जवानों ने ट्रैवर्स क्रॉसिंग तकनीक से लोगों को एक-एक कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
अब भी लापता हैं कई लोग, राहत कार्यों में जुटी हैं टीमें
अब तक की जानकारी के अनुसार, करीब 50 से अधिक लोग लापता हैं और चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। हालात बेहद गंभीर हैं और राहत कार्यों में मौसम भी बड़ी बाधा बना हुआ है।
Pratyaya Amrit बने बिहार के नए मुख्य सचिव नीतीश के भरोसेमंद अफसर की कहानी