संक्षेप में खबर : Ahilyabai मणिकर्णिका घाट पर सौंदर्यीकरण के दौरान तोड़फोड़ को लेकर विवाद अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति तोड़े जाने के आरोप, सरकार ने किया खंडन सीएम योगी ने कांग्रेस पर दुष्प्रचार का आरोप लगाया होल्कर ट्रस्ट ने ऐतिहासिक विरासत के अपमान का दावा किया विकास बनाम विरासत की बहस ने पकड़ा तूल
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर इन दिनों सिर्फ चिताओं की आग नहीं जल रही, बल्कि इतिहास, आस्था और विरासत को लेकर सियासी और सामाजिक विवाद भी धधक रहा है। सवाल सिर्फ सौंदर्यीकरण का नहीं, बल्कि उस विरासत का है, जिसे मालवा की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने काशी को सौंपा था।
काशी और मां अहिल्या: रिश्ता सत्ता का नहीं, श्रद्धा का

मालवा की महारानी अहिल्याबाई होल्कर का काशी से रिश्ता साधारण नहीं, बल्कि गहरा और आत्मिक था। वे भगवान शिव की अनन्य उपासक थीं। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया और गंगा तट पर कई घाट, चबूतरे और महल बनवाए। आज यह इलाका ‘होलकरवाड़ा’ के नाम से जाना जाता है। मणिकर्णिका घाट भी उन्हीं स्थलों में शामिल है, जहां उन्होंने न केवल निर्माण कराया, बल्कि अपनी श्रद्धा की छाप भी छोड़ी।

मणिकर्णिका घाट पर क्यों मचा बवाल?
मणिकर्णिका घाट के आसपास चल रहे सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास कार्य के दौरान तोड़फोड़ के आरोप लगे। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो में दावा किया गया कि निर्माण के नाम पर ऐतिहासिक ढांचे और महारानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया गया है। विपक्षी दलों, कुछ साधु-संतों और यहां तक कि बीजेपी से जुड़े कुछ नेताओं ने भी इस पर सवाल उठाए।

प्रशासन का दावा और FIR की कार्रवाई
वाराणसी प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वायरल हो रहे कई फोटो और वीडियो फर्जी हैं। प्रशासन ने इसे दुष्प्रचार बताते हुए कांग्रेस नेता पप्पू यादव और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह समेत आठ लोगों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

सीएम योगी का कांग्रेस पर हमला
इस पूरे विवाद पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मंदिरों को तोड़ने का “सफेद झूठ” फैला रही है। सीएम योगी ने याद दिलाया कि काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के समय भी इसी तरह की साजिशें रची गई थीं, जब टूटी हुई मूर्तियों के अवशेष लाकर सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाया गया था।

अहिल्याबाई होल्कर: शिवभक्ति और सुशासन की मिसाल
अहिल्याबाई होल्कर सिर्फ एक शासक नहीं, बल्कि खुद को भगवान शिव की सेविका मानती थीं। उनके हर राजकीय आदेश की शुरुआत “हुजूर शंकर” से होती थी। 13 मार्च 1767 को सत्ता संभालने वाली अहिल्याबाई ने 28 वर्षों के शासन में देशभर में 65 मंदिर, धर्मशालाएं, सड़कें, तालाब और घाट बनवाए। काशी में 1771 से 1785 के बीच उन्होंने मणिकर्णिका घाट सहित पांच घाटों का निर्माण कराया।
विकास बनाम विरासत का टकराव
आज उसी मणिकर्णिका घाट पर 29,350 वर्ग मीटर क्षेत्र में श्मशान घाट के आधुनिकीकरण का प्रोजेक्ट चल रहा है। सरकार का कहना है कि दलदली जमीन और बाढ़ से बचाव के लिए 15 से 20 मीटर गहरी पाइलिंग जरूरी है। वहीं आरोप है कि इसी प्रक्रिया में अहिल्याबाई द्वारा बनवाए गए चबूतरे और मूर्तियों को हटाया या तोड़ा गया।
होल्कर ट्रस्ट और वंशजों की नाराजगी

इस घाट की देखरेख इंदौर स्थित खासगी देवी अहिल्याबाई होल्कर चैरिटीज़ ट्रस्ट करता है, जिसकी स्थापना 1962 में हुई थी। ट्रस्ट के अध्यक्ष और अहिल्याबाई के वंशज यशवंतराव होलकर ने आरोप लगाया कि 10 जनवरी 2026 को बिना किसी सूचना के मणिकर्णिका घाट को ध्वस्त कर दिया गया और महारानी की मूर्तियां मलबे में पड़ी हैं।
ट्रस्ट का साफ संदेश: विकास के खिलाफ नहीं, अपमान के खिलाफ हैं
होल्कर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि वह योजनाबद्ध और संवेदनशील विकास के खिलाफ नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास विजन की सराहना करते हुए ट्रस्ट ने कहा कि विकास कार्य ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत के सम्मान के साथ होना चाहिए।
सरकार से क्या मांग कर रहा है ट्रस्ट?
ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री और यूपी मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए, मूर्तियों को सुरक्षित रूप से बरामद कर ट्रस्ट को सौंपा जाए और नए विकास में उन्हें उनके मूल स्थान पर पुनः स्थापित किया जाए।