Wednesday, February 4, 2026

America-India टैरिफ पर अमेरिका-भारत में टकराव ट्रंप सरकार के बीच उम्मीद की किरण – वित्त मंत्री का बड़ा बयान

by Sujal
America-India पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाकर कुल 50% कर दिया है। ट्रंप के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हैं और व्यापार समझौते की उम्मीद अभी भी जिंदा है।

America-India टैरिफ विवाद पर अमेरिका ने भारत से सुलह का दरवाजा खुला रखा

America-India अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने बुधवार से भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इस फैसले ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव को और गहरा कर दिया है, लेकिन इसके बीच अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का बयान उम्मीद जगाता है।

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America-India टैरिफ पर अमेरिका-भारत में टकराव ट्रंप सरकार के बीच उम्मीद की किरण – वित्त मंत्री का बड़ा बयान 7

वित्त मंत्री का बड़ा बयान: रिश्ते मजबूत समझौते की उम्मीद

फॉक्स न्यूज से बातचीत में स्कॉट बेसेंट ने कहा,

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था। मुझे पूरा भरोसा है कि अंततः हम साथ आएंगे।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच रिश्तों को “बहुत अच्छे संबंध” बताया और कहा कि यह दोनों देशों को नजदीक ला सकता है।

टैरिफ से क्यों बिगड़े हालात?

ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला किया। इससे पहले ही टैरिफ 25% था, यानी अब कुल 50% हो गया।

  • अमेरिका का आरोप है कि भारत रूसी तेल खरीदकर मुनाफाखोरी कर रहा है।
  • भारत ने इन आरोपों को नकारते हुए अमेरिकी टैरिफ को अनुचित करार दिया है।

मोदी का स्टैंड: किसानों और छोटे व्यवसायों के हित पहले

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मौकों पर साफ किया है कि भारत अपने किसानों और छोटे कारोबारियों के हितों से समझौता नहीं करेगा। यही वजह है कि अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत ने अपनी नीति पर डटे रहने का फैसला किया है।

भारत का पलटवार: तेल खरीदने पर कड़ा जवाब

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका को दो टूक कहा था

अगर आपको भारत से तेल या रिफाइंड उत्पाद खरीदने में कोई समस्या है, तो उसे न खरीदें

भारत ने यह भी साफ किया कि उसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के साथ रुपए में व्यापार को बढ़ाना है, लेकिन “रुपए को रिज़र्व करेंसी बनाने की कोई योजना नहीं है।

डी-डॉलरीकरण एजेंडे में नहीं: विदेश मंत्रालय

पिछले महीने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया था कि ब्रिक्स देशों का “डी-डॉलरीकरण” करने का कोई एजेंडा नहीं है।

नतीजा: दरवाजा अभी भी खुला है

अमेरिका और भारत के बीच व्यापार युद्ध तेज जरूर हुआ है, लेकिन अमेरिकी वित्त मंत्री के बयान से यह साफ है कि दोनों देश समझौते की राह तलाश सकते हैं। अब नजर आने वाले महीनों में इस विवाद के समाधान पर टिकी रहेगी।

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