Masood जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग में नया चेहरा: अफीरा
Masood ख़ुफ़िया एजेंसियों को लगातार सूचना मिल रही थी कि पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों को फंडिंग और छूट दे रहा है। ऐसे समय में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की महिला ब्रिगेड में नया नाम सामने आया है।
यह नाम है अफीरा बीबी, जो 2019 के पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड उमर फारूक की पत्नी हैं। जैश ने उन्हें अपनी महिला विंग “जमात-उल-मोमिनात” की शूरा (सलाहकार परिषद) सदस्य के रूप में नियुक्त किया है।
ख़ुफ़िया एजेंसियों का कहना है कि यह संगठन अब महिला नेटवर्क के माध्यम से अपनी कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
अफीरा कौन हैं?
अफीरा बीबी का नाम 2019 के पुलवामा आतंकी हमले से जुड़ा है।
उनके पति उमर फारूक उस हमले के मुख्य साज़िशकर्ता थे, जिसमें CRPF के 40 जवान शहीद हुए।

ख़ुफ़िया सूत्रों के अनुसार:
- अफीरा बीबी अब जैश की महिला शाखा की गतिविधियों की देखरेख करेंगी।
- जैश प्रमुख मसूद अज़हर की बहन सादिया अज़हर के साथ मिलकर वे संगठन की सांस्कृतिक और धार्मिक शिक्षा के नाम पर महिलाओं को जोड़ने का काम करेंगी।
- यह संगठन अब महिला सशक्तिकरण का झूठा चेहरा दिखाकर कट्टरपंथ फैलाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
जैश का नया तरीका: महिलाओं के जरिए नेटवर्क मजबूत करना
जैश-ए-मोहम्मद अब अपने संगठन को महिला शक्ति के माध्यम से मज़बूत कर रहा है।
सूत्र बताते हैं कि अफीरा और सादिया की जिम्मेदारी है कि:
- महिलाओं को धार्मिक शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों के नाम पर संगठन से जोड़ा जाए।
- संगठन की कट्टरपंथी विचारधारा और आतंकी गतिविधियों को नए रूप में पेश किया जाए।
- महिला सदस्यों के जरिए संगठन की स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ाई जाए।
यह रणनीति दर्शाती है कि जैश अब महिलाओं को सिर्फ परिवार का हिस्सा नहीं बल्कि संगठन का सक्रिय घटक बनाने पर ध्यान दे रहा है।
पुलवामा हमले की पृष्ठभूमि
2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
इस हमले में CRPF के 40 जवान शहीद हुए और कई अन्य घायल हुए।
- हमले का मास्टरमाइंड था उमर फारूक, अफीरा का पति।
- फारूक मार्च 2019 में कश्मीर के दाचीगाम नेशनल पार्क इलाके में भारतीय सेना के ऑपरेशन में मारा गया।
- उसके बाद भी जैश-ए-मोहम्मद ने अपनी महिला शाखा को मजबूत करने की योजना बनाई।
अफीरा और सादिया का क्या करेंगे
अफीरा बीबी और सादिया अज़हर मिलकर जमात-उल-मोमिनात की गतिविधियों को संभालेंगी।
इनकी जिम्मेदारी में शामिल हैं:
- महिलाओं को धार्मिक शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ना।
- संगठन की महिला शाखा के नेटवर्क को स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना।
- जैश-ए-मोहम्मद की महिला सदस्यता और फंडिंग को बढ़ावा देना।
ख़ुफ़िया एजेंसियों का मानना है कि यह नया चेहरा अफीरा बीबी संगठन के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
खुफ़िया एजेंसियों की सतर्कता
ख़ुफ़िया एजेंसियों ने लगातार अलर्ट जारी किया है:
- पाकिस्तान से जुड़े आतंकी संगठनों को फंडिंग और संरक्षण मिल रहा है।
- जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से कट्टरपंथ फैलाने की कोशिश कर रही है।
- अफीरा और सादिया के नेतृत्व में महिलाओं को धार्मिक विचारधारा से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है।
एजेंसियों का कहना है कि इस महिला शाखा की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
समाज और सुरक्षा की चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि महिला शाखाओं के जरिए आतंकवाद फैलाना एक नया और खतरनाक तरीका है।
- यह संगठन महिलाओं को सक्रिय घटक बनाकर आतंकवाद को सामाजिक स्वीकार्यता देने की कोशिश कर रहा है।
- कट्टरपंथी विचारधारा अब सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं रह गई है।
- समाज और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक नई चुनौती है।
डॉ. रश्मि अग्रवाल, सुरक्षा विशेषज्ञ, बताती हैं:
“महिला शाखाओं के माध्यम से संगठन अपनी जड़ें मजबूत करता है।
यह केवल आतंकवाद का चेहरा नहीं बल्कि सामाजिक और मानसिक प्रभाव भी डालता है
जैश की महिला विंग की वैश्विक पहुँच
जैश-ए-मोहम्मद की महिला शाखा स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हो रही है।
- अफीरा और सादिया महिलाओं को संगठन से जोड़ने के लिए सोशल मीडिया और सामाजिक कार्यक्रमों का इस्तेमाल करेंगी।
- यह शाखा महिला शक्ति के जरिए संगठन को सामाजिक मान्यता और राजनीतिक छवि देने का काम करेगी।
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