Pushkar mela 2025: लाखों में बिक रहे जानवर, GST कैंप से खुला घोड़ों का राज
अजमेर:
Pushkar mela राजस्थान का पुष्कर मेला हमेशा से ही अपनी भव्यता और पशु व्यापार के लिए प्रसिद्ध रहा है। खासकर घोड़ों की बिक्री ने इस मेले को दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया है। इस साल मेले में करोड़ों रुपए की कीमत वाले घोड़ों की खबरें सामने आने के बाद GST विभाग भी सतर्क हो गया। मेले में पहली बार घोड़ों की बिक्री पर 5% GST लागू किया गया है और एक विशेष GST कैंप स्थापित किया गया है।
घोड़ों पर GST का ऐतिहासिक फैसला
अजमेर के सर्कल अधिकारी एच. के. कविया ने बताया कि अन्य जानवरों की बिक्री पर GST नहीं लगाया गया है, लेकिन जीवित घोड़ों पर 5% GST लागू किया गया है। यह टैक्स तभी लागू होता है जब घोड़े की बिक्री 40 लाख रुपये से अधिक में हो। हालांकि, व्यापारी चाहे तो इससे कम कीमत पर भी स्वेच्छा से GST दे सकते हैं।

कविया ने कहा कि GST के जरिए विभाग का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना है और साथ ही मेले में लेन-देन को पारदर्शी बनाना भी है। पशु चिकित्सा विभाग हर घोड़े की बिक्री के लिए चालान और यात्रा परमिट जारी करता है, जिससे GST टीम को जांच में आसानी होती है।
मेले में GST कैंप की तैनाती
पुष्कर मेले में सरकार ने एक विशेष GST कैंप स्थापित किया है। हर दिन 2–3 अधिकारी मेले में मौजूद रहते हैं और राज्य के पशु चिकित्सा विभाग के साथ मिलकर काम करते हैं। उनका काम यह सुनिश्चित करना है कि घोड़ों की बिक्री पर सही तरीके से GST लागू हो और रिकॉर्ड बनाए जाएँ।
पशु व्यापारी अब GST भुगतान की प्रक्रिया में अधिकारियों से मार्गदर्शन भी प्राप्त कर सकते हैं। अधिकारी हर घोड़े की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखते हैं ताकि किसी भी विवाद की स्थिति में प्रमाण मौजूद रहे।
करोड़ों के घोड़ों की कीमत का सच
सोशल मीडिया में इस मेले के दौरान कई घोड़ों की कीमतें करोड़ों में बताई जा रही थीं। उदाहरण के लिए, चंडीगढ़ के शाहबाज ने अपने घोड़े की कीमत 15 करोड़ रुपये बताई थी, जबकि मालिक गैरी गिल ने एएनआई को बताया कि उन्हें 9 करोड़ रुपये का ऑफर मिला।
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आलोक खरे ने बताया कि यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर कई बार घोड़ों को 13 करोड़ तक में बिकते दिखाते हैं। हालांकि, वास्तविक स्थिति यह है कि अभी तक किसी भी घोड़े की बिक्री 1 करोड़ रुपये में नहीं हुई है।
पुष्कर मेला में घोड़ों की असली कीमत
मेले में कई चर्चित घोड़े आए हैं, जिनकी कीमत लाखों में है।
- एक बादल: 15 लाख रुपये
- शहजादी: 51 लाख रुपये
- नगीना: 1 करोड़ रुपये
पशुपालन विभाग के अनुसार, अधिकांश घोड़ों की बिक्री 2–3 लाख रुपये से लेकर 8–10 लाख रुपये तक हुई है। विभाग हर घोड़े की बिक्री पर प्रमाणपत्र और ट्रांसफर परमिट जारी करता है।
पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. खरे ने बताया कि मेले में लगभग 4,500 घोड़े हैं, और किसी भी घोड़े की बिक्री 40 लाख से अधिक नहीं हुई। ऐसे में GST का अनुपालन अब सुनिश्चित किया जा रहा है।

सोशल मीडिया और वायरल कीमतें
सोशल मीडिया पर पुष्कर मेला हमेशा ही वायरल रहा है। कई रील्स और यूट्यूब वीडियोज़ में घोड़ों और भैंसों को “सितारा” बनाकर उनके आसमान छूती कीमतों के टैग दिखाए जाते हैं।
ऑल इंडिया मारवाड़ी हॉर्स सोसाइटी के अध्यक्ष गजेन्द्र सिंह पोसाना ने बताया कि कई घोड़ों के मालिक अपनी घोड़ियों या नर घोड़ों को सिर्फ प्रदर्शित करने के लिए लाते हैं। वे चाहे तो कोई भी कीमत बता सकते हैं, लेकिन वास्तविक मूल्य तब तय होता है जब घोड़ा बिके। कई घोड़े प्रजनन (breeding) के लिए रखे जाते हैं, इसलिए उनका मूल्यांकन प्रदर्शन के लिए किया जाता है।
GST लागू होने का उद्देश्य
GST लागू होने का मुख्य उद्देश्य यह है कि पशु व्यापार में पारदर्शिता और नियमित राजस्व सुनिश्चित किया जा सके। अधिकारी कहते हैं कि इस प्रकार से घोड़ों और अन्य मूल्यवान पशुओं की बिक्री रिकॉर्डेड रहेगी।
कविया ने बताया कि GST का पालन कराना अब मेले के लिए प्राथमिकता है। व्यापारी अगर नियमों का पालन करेंगे, तो उन्हें सरकार की सहायता और मार्गदर्शन मिलेगा।
पुष्कर मेला: राजस्थान का सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र
पुष्कर मेला सिर्फ पशु व्यापार का केंद्र नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन का भी हिस्सा है। लाखों लोग मेले में आते हैं, घोड़ों की सुंदरता और बाजार में उनकी कीमतों को देखने के लिए।
इस बार GST लागू होने के बाद मेले की आर्थिक गतिविधियों पर सरकारी नजर और भी मजबूत हो गई है। इससे व्यापारियों और खरीदारों दोनों के लिए पारदर्शिता बढ़ेगी और असली कीमतों का पता चलेगा।
विशेषज्ञों की राय
- गजेन्द्र सिंह पोसाना: “घोड़े दिखाने के लिए लाए जाते हैं, हर कोई अपनी संपत्ति का मूल्य तय करता है। वास्तविक बिक्री मूल्य तब ही तय होता है जब घोड़ा खरीदा जाए।”
- डॉ. आलोक खरे: “सोशल मीडिया में जो कीमतें दिखाई जाती हैं, वे अक्सर भ्रामक होती हैं। GST और प्रमाणपत्र से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होती है।”
मेले की सुरक्षा और निगरानी
GST अधिकारी और पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने मिलकर यह सुनिश्चित किया है कि मेले में हर लेन-देन सुरक्षित और रिकॉर्डेड हो। उन्होंने कहा कि अब तक किसी भी घोड़े की बिक्री करोड़ों में नहीं हुई।
इस प्रकार, पुष्कर मेला अब सरकारी निगरानी और पारदर्शिता का उदाहरण बनता जा रहा है।
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