संक्षेप में पूरी खबर (Summary) Rajnath Singh लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विपक्ष पर अचानक भड़क उठे। लगातार टोकाटाकी से नाराज होकर उन्होंने सख्त लहजे में कहा—”कौन बैठाने वाला है… ये हिम्मत हो गई?” सिंह ने कांग्रेस की तुष्टीकरण राजनीति, वंदे मातरम के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय और वर्तमान में बंगाल की स्थितियों पर भी तीखे प्रहार किए।
Rajnath Singh लोकसभा में बढ़ा तनाव: शांत स्वभाव के राजनाथ सिंह अचानक क्यों भड़के?

संसद के शीतकालीन सत्र में सोमवार का दिन उस समय गर्मा गया जब वंदे मातरम पर हो रही चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विपक्षी सदस्यों की टोकाटाकी से नाराज हो उठे। आमतौर पर गंभीर और शांत स्वभाव के लिए जाने जाने वाले राजनाथ सिंह ने इस बार कड़ा रूख अपनाया।
कौन बैठाएगा… ये हिम्मत हो गई? राजनाथ का तीखा जवाब
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जैसे ही विपक्षी सांसदों ने उनके भाषण में दखल देना शुरू किया, माहौल अचानक बदल गया।
राजनाथ सिंह ने तीखे स्वर में कहा—कौन बैठाने वाला है… कौन बैठाएगा? क्या बात करते हैं… बैठ! ये हिम्मत हो गई है.”उन्होंने तत्काल अध्यक्ष से भी कहा कि ऐसी अव्यवस्था को रोका जाए।
“मैंने कभी संसद की मर्यादा नहीं तोड़ी”—राजनाथ सिंह का स्पष्ट संदेश
विपक्ष को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि चर्चा में असहमति हो सकती है, लेकिन शोर-शराबा नहीं होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा—सच बोले या सच से परे बोले, पर संसद की मर्यादा का पालन होना चाहिए। मैं हमेशा मर्यादा में रहा हूं और कभी इसका उल्लंघन नहीं किया।

वंदे मातरम पर सियासत: राजनाथ ने कांग्रेस पर साधा निशाना
राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में वंदे मातरम के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय का मुद्दा उठाया और इसे तुष्टीकरण की राजनीति की शुरुआत बताया।उन्होंने कहा—वंदे मातरम के साथ अन्याय कोई अलग घटना नहीं थी, यह कांग्रेस की तुष्टीकरण राजनीति का शुरुआती अध्याय था, जिसने बाद में देश का विभाजन कराया।”राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को बराबरी देने की बात थी, पर कांग्रेस ने खंडित किया”रक्षा मंत्री ने बताया कि आज़ादी के बाद राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को समान दर्जा देने की मांग थी, पर राजनीतिक वजहों से इसे रोका गया।
बंकिमचंद्र की पुस्तक और बंगाल का मुद्दा भी उठा
राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि वंदे मातरम या आनंद मठ कभी इस्लाम विरोधी नहीं रहे, लेकिन राजनीतिक रूप से इसे गलत रूप दिया गया।साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल की स्थिति पर भी चिंता जताई—आज बहुत से परिवार बंगाल छोड़ने को मजबूर हैं, और यह TMC की विभाजनकारी राजनीति और घुसपैठियों को शरण देने की नीति का नतीजा है।”
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