Wednesday, February 4, 2026

Supreme Court ने तमिलनाडु की अर्जेंट याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, समग्र शिक्षा योजना के फंड को लेकर उठी बहस

by Sujal
तमिलनाडु सरकार ने केंद्र से समग्र शिक्षा योजना के तहत 2291 करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन Supreme Court अर्जेंट सुनवाई से इनकार किया. जानिए याचिका में क्या था दावा और कोर्ट का क्या रहा रुख.

Supreme Court ने तमिलनाडु की अर्जेंट याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

Supreme Court Of India | India

नई दिल्ली: Supreme Court र्ट ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार की उस अर्जेंट याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार से समग्र शिक्षा योजना के तहत 2291 करोड़ रुपये की बकाया राशि जारी करने की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति पी.के. मिश्र और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा कि “यह मामला अर्जेंट नहीं है, इसे सामान्य प्रक्रिया से ही निपटाया जाएगा।”


याचिका में क्या मांग की गई थी?

तमिलनाडु सरकार की ओर से दाखिल की गई याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार ने राज्य के गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत मिलने वाले फंड को मनमाने ढंग से रोका है। सरकार का आरोप है कि राज्य को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) अपनाने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो संघीय ढांचे के खिलाफ है।


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तमिलनाडु सरकार की दलीलें

याचिका में तमिलनाडु सरकार ने यह स्पष्ट किया कि वह केंद्र सरकार की “तीन भाषा नीति” को स्वीकार नहीं करती। राज्य सरकार का दावा है कि केंद्र द्वारा फंड रोकना एक राजनीतिक दबाव का तरीका है, ताकि तमिलनाडु को केंद्र की नई शिक्षा नीति (NEP) को मजबूरी में लागू करना पड़े।

सरकार ने कहा कि वह हिंदी को अनिवार्य रूप से थोपने के पक्ष में नहीं है, और केंद्र का ऐसा रवैया संघवाद का उल्लंघन है।


क्या है समग्र शिक्षा योजना?

समग्र शिक्षा योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है जो प्राथमिक से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इसके अंतर्गत केंद्र सरकार राज्यों को शिक्षा के लिए फंड मुहैया कराती है, लेकिन इसमें राज्य सरकार की नीतियों के अनुसार कार्यान्वयन होता है।


कोर्ट का नजरिया क्या रहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि वह इस मामले की तत्काल सुनवाई करने के पक्ष में नहीं है। पीठ ने कहा कि याचिका को सूचीबद्ध किया जाएगा और नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी। कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी तत्काल जवाब दाखिल करने की कोई मांग नहीं की।


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केंद्र सरकार पर क्या आरोप हैं?

तमिलनाडु सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार ने 2291 करोड़ रुपये की बकाया राशि रोकी हुई है, जो कि राज्य के गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

इसके अलावा, याचिका में यह भी मांग की गई है कि केंद्र सरकार को आदेश दिया जाए कि वह:

  • बकाया राशि एक तय समयसीमा में जारी करे
  • पूरी मूल राशि पर 6% ब्याज भी दे

पीएम श्री स्कूल योजना और विवाद

तमिलनाडु ने केंद्र द्वारा हाल ही में शुरू की गई पीएम श्री स्कूल योजना को राज्य पर थोपा गया फैसला बताया। सरकार का कहना है कि जब तक केंद्र और राज्य सरकार के बीच इस योजना पर लिखित सहमति नहीं बनती, तब तक यह राज्य में लागू नहीं हो सकती।

राज्य सरकार ने यह भी जोड़ा कि शिक्षा जैसे विषय पर केंद्र का ऐसा हस्तक्षेप राज्य के अधिकारों का हनन है।


राजनीतिक गलियारों में हलचल

इस मुद्दे पर तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा गर्म है। डीएमके सरकार ने यह सवाल उठाया है कि क्या शिक्षा का अधिकार भी अब केंद्र सरकार के नियंत्रण में चला गया है?

राज्य के शिक्षा मंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा,

“हम बच्चों की शिक्षा के लिए केंद्र पर निर्भर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और भाषा पर समझौता किया जाए।”


आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बाद अब तमिलनाडु सरकार को नियमित प्रक्रिया के तहत सुनवाई का इंतजार करना होगा। कोर्ट इस मामले को बाद में सूचीबद्ध कर सकता है।

राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि अगर जल्दी सुनवाई नहीं हुई, तो वह राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर दबाव बनाने की रणनीति अपना सकती है।

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