Wednesday, February 4, 2026

Vaishno Devi रोपवे विवाद: कटरा में आंदोलन तेज, लोगों ने दी भूख हड़ताल की चेतावनी

by Sujal
Vaishno Devi रोपवे प्रोजेक्ट को लेकर कटरा में विरोध बढ़ गया है। स्थानीय दुकानदार, कारोबारी और टट्टू चलाने वाले इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये परियोजना हजारों परिवारों की आजीविका छीन लेगी। लोग भूख हड़ताल और बड़े आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं।

Vaishno Devi रोपवे विवाद: कटरा में विरोध बढ़ा, भूख हड़ताल की चेतावनी

Vaishno Devi जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध तीर्थस्थल माता वैष्णो देवी में प्रस्तावित रोपवे परियोजना को लेकर विवाद एक बार फिर गहराता जा रहा है। इस पवित्र स्थल पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाई जा रही यह परियोजना अब स्थानीय लोगों के गुस्से का कारण बन गई है।

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स्थानीय लोगों में आक्रोश, आंदोलन की तैयारी

कटरा और आस-पास के इलाकों में रहने वाले स्थानीय दुकानदारों, होटल व्यवसायियों और टट्टू मालिकों ने इस परियोजना का कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि रोपवे बनने से पारंपरिक रोजगार पर गहरी चोट पड़ेगी।

गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर “रोपवे नहीं चाहिए” और “हमारी रोज़ी-रोटी वापस करो” जैसे नारे लगाए। उन्होंने श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) और प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।

आजीविका का संकट — 60 हजार परिवार प्रभावित होने का दावा

कटरा संघर्ष समिति और स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, इस परियोजना से करीब 60,000 से अधिक परिवारों की रोज़ी-रोटी पर असर पड़ेगा।
इनमें टट्टू चलाने वाले, कंधा ढोने वाले मजदूर, होटल संचालक, दुकानदार, और स्थानीय गाइड शामिल हैं।

इनका कहना है कि तीर्थ यात्रा के रास्ते पर पर्यटक जब पैदल या टट्टू से यात्रा करते हैं, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था चलती है। लेकिन अगर ताराकोट से सांझी छत तक रोपवे बन गया, तो श्रद्धालु सीधे ऊपर पहुंच जाएंगे और नीचे का पूरा बाजार और रोजगार ठप हो जाएगा।

भूख हड़ताल और पूर्ण बंद की चेतावनी

स्थानीय संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर निर्माण कार्य नहीं रुका, तो बड़ा आंदोलन और भूख हड़ताल की जाएगी।
आंदोलनकारियों ने कहा है कि जब तक रोपवे परियोजना को पूरी तरह से रद्द नहीं किया जाता, विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

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उनका कहना है कि पिछले साल दिसंबर में भी इसी मुद्दे पर एक सप्ताह तक पूर्ण बंद और धरना प्रदर्शन किया गया था, लेकिन तब प्रशासन ने सिर्फ आश्वासन दिया और अब बिना राय लिए काम शुरू कर दिया गया।

प्रशासन पर भरोसा तोड़ा गया — लोगों का आरोप

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 10 महीने पहले जम्मू के डिवीजनल कमिश्नर ने यह आश्वासन दिया था कि स्थानीय निवासियों की राय लिए बिना कोई निर्णय नहीं होगा। लेकिन अब प्रशासन ने उस वादे को दरकिनार कर दिया है।

लोगों का कहना है कि यह केवल एक धार्मिक स्थल का मामला नहीं है, बल्कि यह कटरा की परंपरा, संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा है।

क्या है यह विवादित रोपवे परियोजना?

करीब 250 करोड़ रुपये की यह परियोजना ताराकोट मार्ग को सांझी छत से जोड़ने वाले रोपवे के निर्माण से जुड़ी है।
यह रोपवे त्रिकुटा पहाड़ियों में स्थित माता वैष्णो देवी की पवित्र गुफा तक जाने वाले लगभग 12 किलोमीटर लंबे खड़ी चढ़ाई वाले मार्ग को कवर करेगा।

इस रोपवे के बन जाने से श्रद्धालु महज 6 से 7 मिनट में मंदिर तक पहुंच सकेंगे, जो पहले पैदल 6-7 घंटे का सफर हुआ करता था।

श्रद्धालुओं के लिए सुविधा या स्थानीयों के लिए मुसीबत?

श्रद्धालु इस परियोजना को बड़ी राहत के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि इससे वृद्ध और दिव्यांग यात्रियों के लिए यात्रा आसान हो जाएगी।
लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि सुविधा के नाम पर उनका जीविकोपार्जन खतरे में डालना अन्यायपूर्ण है।

उनका कहना है कि सरकार को रोजगार का वैकल्पिक इंतजाम करना चाहिए, तभी परियोजना स्वीकार्य होगी।

कई संगठनों का मिला समर्थन

इस आंदोलन को कटरा संघर्ष समिति, चैंबर ऑफ कॉमर्स, और युवा राजपूत सभा जैसे कई स्थानीय संगठनों का समर्थन मिल चुका है।
इन संगठनों ने घोषणा की है कि वे आंदोलनकारियों के साथ खड़े हैं और अगर जरूरत पड़ी तो जम्मू बंद या तीर्थ यात्रा रोकने तक की रणनीति अपनाई जाएगी।

स्थानीयों की मुख्य मांगें

1️⃣ रोपवे परियोजना को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
2️⃣ प्रशासन स्थानीय लोगों से चर्चा के बाद ही आगे की योजना बनाए।
3️⃣ जिनकी आजीविका प्रभावित होगी, उनके पुनर्वास का प्रावधान किया जाए।
4️⃣ सरकार रोजगार के नए अवसर सुनिश्चित करे।

भवन-भैरो रोपवे पहले से चालू, दूसरा विवादित

वैष्णो देवी में इस समय दो रोपवे प्रोजेक्ट हैं —
पहला भवन से भैरो मंदिर तक, जो पहले से चालू है और एक घंटे की पैदल यात्रा को सिर्फ 5 मिनट में बदल देता है।
दूसरा ताराकोट से सांझी छत तक, जो निर्माणाधीन है और इसी को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।

यह नया मार्ग यात्रा को 7 घंटे से घटाकर सिर्फ 6 मिनट का कर देगा।

सरकार और बोर्ड की प्रतिक्रिया

अब तक श्राइन बोर्ड या प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मानना है कि यह परियोजना श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर शुरू की गई थी।

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वहीं, प्रशासन इस बात पर जोर दे रहा है कि स्थानीयों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाएगा और किसी को बेरोजगार नहीं होने दिया जाएगा।

कटरा की अर्थव्यवस्था पर खतरे की घंटी

कटरा, जहां हर साल 1 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं, पूरी तरह तीर्थ पर्यटन पर निर्भर है।
यहां के होटलों, दुकानों और टट्टू व्यवसायों से हजारों परिवार जुड़े हैं। ऐसे में अगर रोपवे बन गया, तो लोगों को डर है कि तीर्थ मार्ग खाली हो जाएगा और उनका व्यवसाय खत्म हो जाएगा।

स्थानीयों की भावनाएं और आस्था दोनों जुड़ी हैं

कई स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे माता वैष्णो देवी की सेवा को केवल रोजगार नहीं बल्कि भक्ति और आस्था का हिस्सा मानते हैं।
उनका कहना है कि यह परियोजना भक्ति मार्ग को मशीनों के भरोसे कर देगी, जिससे तीर्थ की पवित्रता और परंपरा पर असर पड़ेगा।

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