Tuesday, February 3, 2026

Chhath Puja 2025: छठ पूजा पर जरूर बनते हैं ये खास पकवान इनके बिना अधूरी मानी जाती है पूजा

by Sujal
Chhath Puja2025 पर जानिए उन विशेष प्रसाद और पकवानों के बारे में जो इस पर्व को पूर्ण बनाते हैं — ठेकुआ, रसिया खीर, कसार के लड्डू से लेकर कद्दू भात तक। जानें इनके धार्मिक महत्व और आसान विधि।

Chhath Puja 2025: छठ पूजा पर जरूर बनते हैं ये खास पकवान इनके बिना अधूरी मानी जाती है पूजा

Chhath Puja केवल एक पर्व नहीं बल्कि आस्था, श्रद्धा और शुद्धता का प्रतीक है। यह त्योहार सूर्य देव और छठी मैया की पूजा का पर्व है, जो चार दिनों तक चलता है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में यह उत्सव बड़े भव्य रूप में मनाया जाता है। इस दौरान व्रती महिलाएं न केवल उपवास रखती हैं, बल्कि पूजा के लिए विशेष पकवान और प्रसाद तैयार करती हैं, जिनका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद गहरा होता है।

छठ पूजा की शुरुआत और महत्व

छठ पर्व की शुरुआत “नहाय-खाय” से होती है। यह दिन शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। व्रती इस दिन स्नान कर लौकी-चना दाल और भात का सेवन करती हैं, जिसे सात्विक भोजन माना जाता है। इसके बाद खरना आता है, जिसमें गुड़ की रसिया खीर और रोटी का प्रसाद बनता है।

इसके अगले दिन “संध्या अर्घ्य” और चौथे दिन “उषा अर्घ्य” यानी सुबह का अर्घ्य दिया जाता है। इस दौरान व्रती महिलाएं और पुरुष व्रत रखकर अस्ताचलगामी और उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर आशीर्वाद मांगते हैं।

1. ठेकुआ – छठ पूजा का सबसे प्रमुख प्रसाद

ठेकुआ को छठ का सबसे महत्वपूर्ण प्रसाद माना जाता है। इसे हर घर में श्रद्धा और प्यार से बनाया जाता है।

सामग्री:

  • गेहूं का आटा – 2 कप
  • गुड़ – ½ कप (पिघला हुआ)
  • सौंफ – 1 चम्मच
  • घी – ¼ कप
  • तलने के लिए तेल या घी

विधि:
पहले गुड़ को पानी में घोलकर छान लें। फिर आटे में सौंफ और घी डालकर मोयन तैयार करें। अब गुड़ का घोल डालकर आटा गूंथ लें। छोटी-छोटी लोइयां बनाकर सांचे से आकार दें। फिर मीडियम आंच पर सुनहरा होने तक तलें। तैयार ठेकुआ को ठंडा करके पूजा में अर्पित करें।

2. रसिया खीर – खरना की मीठी खुशबू

रसिया खीर यानी गुड़ की खीर, छठ पूजा के दूसरे दिन “खरना” के लिए बनाई जाती है। यह प्रसाद हर घर में भक्तिभाव से तैयार किया जाता है।

सामग्री:

  • बासमती चावल – ½ कप
  • दूध – 1 लीटर
  • गुड़ – स्वादानुसार
  • घी – 1 चम्मच
  • ड्राई फ्रूट्स – बादाम, काजू, किशमिश

विधि:
पहले चावल को धोकर घी में हल्का सा भून लें। फिर दूध को उबालें और उसमें चावल डालें। जब चावल पक जाए, तो गैस धीमी कर दें और गुड़ डालें। ध्यान रहे, गुड़ डालते समय दूध को फटने से बचाने के लिए दूध थोड़ा ठंडा हो। इसमें ड्राई फ्रूट्स मिलाएं और खीर को चढ़ावा के रूप में अर्पित करें।

3. कसार के लड्डू – शुभता और समृद्धि का प्रतीक

कसार के लड्डू का नाम आते ही छठ की खुशबू मन में उतर जाती है।

सामग्री:

  • गेहूं का आटा – 1 कप
  • गुड़ – ½ कप
  • घी – ¼ कप
  • इलायची पाउडर और सौंफ – स्वादानुसार
  • ड्राई फ्रूट्स – इच्छानुसार

विधि:
घी गर्म करें और उसमें आटे को सुनहरा होने तक भूनें। फिर गुड़ को पिघलाकर आटे में मिलाएं। इलायची, सौंफ और ड्राई फ्रूट्स डालें। मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने पर गोल लड्डू बनाएं। ये लड्डू छठ पूजा में प्रसाद के रूप में विशेष स्थान रखते हैं।

4. कद्दू की सब्जी और भात – नहाय-खाय का स्वाद

छठ की शुरुआत जिस दिन से होती है, उस दिन व्रती लौकी-चना दाल और कद्दू-भात खाते हैं। इसे अत्यंत पवित्र भोजन माना जाता है।

सामग्री:

  • कद्दू – 250 ग्राम
  • चावल – 1 कप
  • सेंधा नमक – स्वादानुसार
  • जीरा, हल्दी, मिर्च – आवश्यकतानुसार

विधि:
कद्दू को काटकर हल्दी और जीरे के साथ पकाएं। इसमें सेंधा नमक डालें और धीमी आंच पर पकने दें। भात को सादा पकाएं। यह भोजन छठ व्रत की शुद्धता का प्रतीक है।

5. आटे के लड्डू – परंपरा और स्वाद का मेल

आटे के लड्डू हर त्योहार में बनाए जाते हैं, लेकिन छठ में इनका स्वाद और भी खास होता है।

सामग्री:

  • गेहूं का आटा – 1 कप
  • घी – ¼ कप
  • गुड़ – ½ कप
  • इलायची और ड्राई फ्रूट्स – स्वादानुसार

विधि:
आटे को घी में सुनहरा होने तक भूनें। गुड़ को पिघलाकर मिलाएं और ठंडा होने पर लड्डू बना लें।

छठ पूजा में प्रसाद का धार्मिक महत्व

छठ में बनाए गए हर पकवान का धार्मिक अर्थ है।

  • ठेकुआ समर्पण का प्रतीक है।
  • रसिया खीर पवित्रता और कृतज्ञता को दर्शाती है।
  • कसार के लड्डू शुभता और समृद्धि के प्रतीक हैं।
  • कद्दू-भात सात्विकता और सादगी का प्रतीक हैं।

इन पकवानों में लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं किया जाता। इन्हें केवल शुद्ध घी, गुड़, और गेहूं के आटे से बनाया जाता है ताकि प्रसाद पवित्र रहे।

छठ पूजा और सामाजिक एकजुटता

छठ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि समाज को जोड़ने वाला त्योहार है। मोहल्लों, कॉलोनियों और घाटों पर सामूहिक पूजा होती है। लोग एक-दूसरे के साथ प्रसाद साझा करते हैं, और यह परंपरा समाज में भाईचारे का संदेश देती है।

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